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बनाए मस्ती का माहौल

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  डीजे व‌र्ल्ड की चकाचौंध और धमाकेदार म्यूजिक ने युवाओं के मन में डीजे बनने का अरमान जगाया है। डीजे बनने के लिए क्या करें, बता रहे हैं दिल्ली के चर्चित डीजे विक्रांत पावा और वार ऑफ द डीजे विनर (2004) डीजे किरन : आपने  शादी या पार्टी में लोगों को डांस फ्लोर पर मस्ती में झूमते हुए जरूर देखा होगा। इस मस्ती भरे माहौल के पीछे होता है डीजे यानी डिस्क जॉकी, जो चुनिंदा गानों और फास्ट म्यूजिक बीट्स पर सबको थिरकने के लिए मजबूर कर देता है। कौन बन सकता है डीजे एक डीजे का व्यक्तित्व आकर्षक और प्रभावशाली होना चाहिए। चूंकि व्यक्तित्व का विकास शिक्षा से ही हो सकता है, इसलिए कम से कम उसे ग्रेजुएट तो होना ही चाहिए। साथ ही अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं का भी पूर्ण ज्ञान होना चाहिए, ताकि कम्युनिकेशन में कोई समस्या न आए। ट्रेनिंग कहां से लें ट्रेनिंग से पहले यह जान लें कि डीजेइंग दो तरह की होती है- क्लब डीजे और मोबाइल डीजे। दोनों में अंतर केवल इतना है कि क्लब डीजे क्लब में म्यूजिक बजाता है,जबकि मोबाइल डीजे शादियों और प्राइवेट पार्टियों में म्यूजिक प्ले करता है। इसके लिए निम्न कोर्स उपलब्...

घुंघरुओं से जुड़ी जीवन की डोर

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  आमतौर पर घुंघरू को पावों में बांध कर नृत्य करने का साज मान लिया जाता है लेकिन अगर इनके विविध पहलुओं पर नजर डालें तो इनमें मानवीय जीवन के तमाम पहलू जुड़े हुए हैं। घुंघरुओं को ऐसे ही नजरिए से देखा है ग्वालियर के युवा चित्रकार मनीष चंदेरिया ने। उन्होंने इनके जीवन के हर रंग को देखा है। आशा-निराशा, खुशी-गम और भी न जाने क्या-क्या..। इनमें रंगों का समिश्रण बला की खूबसूरती ला देता है। एसजी ठाकर सिंह आर्ट गैलरी में इंडियन अकादमी आफ फाइन आर्ट्स की ओर से 3 अक्तूबर से लगाई गई सामूहिक प्रदर्शनी में चर्चा का विषय बने चंदेरिया के चित्रों की संख्या तो मात्र छह है लेकिन इनमें सारे समाज का चिंतन और मनन समाया हुआ है। एक चित्र में अकेले घुंघरू को बना कर इंसान के चिंतन की मुद्रा को दर्शाने की कोशिश की गई है। दूसरे चित्र में उन्होंने एक नृत्यकी के जोश को उकेरा है। चित्रों में स्पष्ट होता है कि जब नृत्यक जोश में नृत्य करता है तो उसका रिदम कैसा होता है। उसके जोश में लय तो बनती ही है लेकिन कुछ घुंघरू टूटते भी हैं। इस बिखराव को उन्होंने धारा से अलग हट कर जीने वाले इंसान के अकेलेपन और बेबसी को दर्शाया...

मसखरे अमिताभ का मनोरंजक अंदाज

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  मिरर पर टेप चिपकाना अमर-अकबर-एंथोनी फिल्म के एक दृश्य में एंथोनी की फिल्म में जमकर पिटाई होती है। शरीर के हर हिस्से में चोट के निशान लिए एंथोनी घर आता है। शराब के नशे में होने के कारण वह मिरर में अपनी छाया से ही बातें करने लगता है। यही नहीं, वह मजेदार बातें करते हुए अपने चोट वाले स्थानों के बजाय मिरर की अपनी तस्वीर पर बैंडेज चिपकाता है। बीच-बीच में कहता भी जाता है-हिलना नहीं। यह सीन अमिताभ से इतने परफेक्शन के साथ किया कि हर कोई वाह-वाह कर उठा। ..क्योंकि वह दारू नहीं पीता सत्ते पर सत्ता फिल्म में अमिताभ सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि के सबसे बड़े भाई रवि बने हैं। फिल्म के मुख्य विलेन अमजद खान से वे मिलते हैं। शराब पीने के दौरान वे अमजद को अपने भाइयों के बारे में बताना शुरू करते हैं। हर भाई की अच्छाई बताने के बाद वे अपनी बात का समापन इसी वाक्य से करते हैं-..क्योंकि वह दारू नहीं पीता। दारू पीने से लीवर खराब हो जाता है। बहुत बुरी चीज है। वीरू की शादी का प्रस्ताव लेकर पहुंचना शोले फिल्म में जय बने अमिताभ अपने जिगरी दोस्त वीरू की शादी का प्रस्ताव लेकर बसंती की मौसी के पास जाते हैं। प...

अमिताभ बच्चन, सिनेमा और रंगमंच

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  बंगाल के प्रसिद्ध फिल्मकार रितुपर्णो घोष की अमिताभ बच्चन और प्रिटी जिंटा अभिनीत फिल्म ‘ द लास्ट लीयर ’ अंग्रेजी भाषा में बनाई गई है। यह फिल्म उत्पल दत्त के नाटक ‘आजकेर शाहजहां’ से प्रेरित है। मराठी भाषा में भी दशकों पूर्व इस तरह का नाटक लिखा गया है, शायद उसका नाम ‘नट सम्राट’ था। दरअसल पांचवें दशक के अंत में हेनरी डेन्कर का उपन्यास ‘द डायरेक्टर’ प्रकाशित हुआ था। यह संभव है कि इस तरह के सारे प्रयासों की गंगोत्री वही उपन्यास है। सारांश यह है कि प्रेरणा न केवल मुंबई के निर्देशक लेते हैं, वरन इस खेल में सभी शामिल हैं और वो भी जिनकी नाक पर इंटेलेक्चुअल चश्मा चढ़ा है। हेनरी डेन्कर के उपन्यास में एक युवा प्रतिभाशाली फिल्मकार से एक मंजा हुआ पूंजी निवेशक कहता है कि असमय सेवानिवृत्त सुपर सितारे को राजी कर सको, तो असीमित धन उपलब्ध है। युवा निर्देशक बड़ी मुश्किल से नायक-नायिका को अनुबंधित करता है और लोकेशन पर बुजुर्ग तकनीशियनों का आदर पाने के लिए अपनी जान खतरे में डालकर भागते हुए घोड़ों के बीच एक दृश्य फिल्माता है। शूटिंग के साथ-साथ एक त्रिकोणात्मक प्रेमकथा भी पनपती है। निर्देशक सेक्स सिंबल न...

हैली के साथ चमत्कार

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  चमत्कार सेलिब्रिटीज के साथ भी होते हैं। अभिनेत्री हैली बेरी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। हैली ने हाल ही में एक साक्षात्कार में बताया है कि जब वे मेडीटेशन करती हैं, तो उन्हें ऐसा एहसास होता है, जैसे वे अपने स्वर्गवासी पिता के बिल्कुल करीब हैं। बेरी मानती हैं कि जब आपका किसी अपने से गहरा नाता हो, तो मेडीटेशन की प्रक्रिया से उन्हें अपने करीब महसूस किया जा सकता है। वे अपने पिता की मृत्यु के पश्चात भी मानती हैं कि उनका और उनके पिता का रिश्ता और मजबूत हो गया है। वे उस दिन से ही मेडिटेशन कर रही हैं, जिस दिन उनके पिता इस दुनिया में नहीं रहे थे। जेजीबू में जब वे मेडिटेशन करती हैं, तो कल्पना करती हैं कि पिता उनके सामने बैठे हैं और उनसे बातें कर रहे हैं। बेरी इन दिनों गर्भवती भी हैं और उनके नए खुलासे ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया है। इससे बेपरवाह वे अपने कथन पर पूरी तरह से अटल हैं। हालांकि वे जानती हैं कि उनके पिता का व्यवहार उनकी मां और बहन के प्रति अच्छा नहीं था और वे घर में अक्सर कलह किया करते थे। फिर भी हैली को उनके प्रति कोई नफरत नहीं है और वे उनकी सारी बुराइयों के लिए उन्हें अपनी ओर स...

पेरिस हैं मॉडर्न प्रिंसेस डायना

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  हॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘द क्वीन’ की ऑस्कर पुरस्कार विजेता अभिनेत्री हेलन मिरेन ने एक्ट्रेस और सोशलाइट पेरिस हिल्टन को प्रिंसेस डायना का मॉडर्न वर्जन बताया है। मिरेन का कहना है कि पेरिस और डायना दोनों की परवरिश एक जैसी ही हुई है और दोनों के मन में हमेशा अभिमान का भाव रहा है। डायना ने भी अपने आगे दुनियावालों को मूर्ख समझा और पेरिस को भी उन्होंने डायना के नक्शेकदम पर बताया। खास बात यह है कि सिर्फ मिरेन ही नहीं, बल्कि खुद पेरिस हिल्टन का मानना भी यही है कि वे आधुनिक दौर की डायना हैं। यही नहीं बड़बोली पेरिस ने यहां तक कहा है कि हर दौर में एक न एक आइकॉन जरूर होता है। उन्होंने डायना के साथ-साथ अपनी तुलना मार्लिन मुनरो से भी की है। पेरिस खुद को इस दौर का आइकॉन मानती हैं। हेली बेरी ने किया हैरान अभिनेत्री हेली बेरी ने अपने एक खुलासे से सभी को हैरत में डाल दिया। खुद को तरोताजा रखने के लिए नहाने से कभी परहेज नहीं करने वाली बेरी ने एक फिल्म में अपने किरदार के लिए हद ही कर दी। हेली ने बताया कि 1991 में बनी फिल्म ‘जंगल फीवर’ में अपने किरदार में जान डालने के लिए उन्होंने एक माह तक स्नान नह...

छात्रा को फीस वापस लौटाए निफ्ट

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  दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने दि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) द्वारा एक लड़की को उसके द्वारा चाहे गए केंद्र में प्रवेश से इनकार करने के बाद तीन लाख रुपए का शुल्क लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने संस्थान की खिंचाई करते हुए उस नियम को अनैतिक व अनुचित करार दिया कि एक बार जमा किया गया शुल्क लौटाया नहीं जाएगा। शिखा गोयल ने संस्थान के दिल्ली केंद्र में प्रवेश के लिए आवेदन किया था लेकिन उसे कोलकाता केंद्र में सीट आवंटित की गई। इस वजह उसने कोर्स से नाम वापस ले लिया। इस पर निफ्ट ने उसके द्वारा जमा करवाई गई करीब तीन लाख रुपए की फीस वापस करने से इनकार कर दिया। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जेडी कपूर ने फीस नहीं लौटाने पर फैशन इंस्टीट्यूट को लताड़ते हुए कहा, ‘यह हमारी समझ से परे है कि कोई ऐसा संस्थान इस प्रकार की अनुचित तथा संदेहास्पद गतिविधियों में लिप्त होगा कि बिना कोई कोचिंग या सेवा मुहैया कराए तीन लाख रुपए का भारी-भरकम शुल्क दबा ले।’ आयोग ने संस्थान को आदेश दिए कि वह शिखा को फीस वापस करे।