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LEARN ABOUT THE ESSENTIAL WAYS TO MONETIZE YOUR WEBSITE OR BLOG

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  Are you finished with making your website getting live? Well, the next and the most foremost step necessitate you to think about  monetizing your site . In order to make money via your site, you need to incessantly upgrade your site and elide certain changes or add-on things that help in making your website highly productive. Nonetheless, there is plethora of ways that you can take up to monetize your website, but be wary as some of these methods can be complex and even expensive. Without a doubt, generating good traffic to your site has been one of the most effective ways that most likely help website earn huge profits. How? There’s an obvious answer to it – when more people will visit your site you’ll likely make more sales. Many people often think how merely getting traffic to their website can get them overwhelming rich returns, earlier even I was confused as how it was possible, until I myself discovered a few ways that made me understand how ge...

3 Creepy Myths about ‘Buying’ Facebook Likes Nobody Wants to Tell You

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  Let me Guess.. We all want our blogs to get to the top with insane amount of fan following.  Likes, Pins, Followers, Stumbles  : Every blogger loves that.  You, me or anyone else would love to get Thousands and Thousands of likes in their fan pages. Okay, but the question is HOW? Now there’s two ways of doing it. Either the ol’ traditional way of building fans on trust; or the new ways of ‘ Buying fans ‘ for a few bucks. You see, ‘ likes ‘ has gone through a drastic change in recent years.  Earlier we needed almost a Years’ time to get atleast thousands likes. But, why to do so much hardwork, when you can get more than 1000+ likes in a matter of seconds? Moreover websites such as Fiverr and SEOclerks have paved the way of buying ‘ LIKES ‘. But why to buy fans? This has been the burning question among bloggers these days. Some go with and some against it. It has both pros and cons at the same time. Now, reverting back to the question, i...

A Career as Information Systems Auditor

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  कंपनियों  में आज कंपनी सेक्रेट्री का पद काफी महत्वपूर्ण हो गया है। यह कंपनियों में सरकारी नियमों को लागू कराने वाला अधिकारी होता है। द इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटेरीज ऑफ इंडिया कंपनी सेके्रटरी का कोर्स संचालित करता है। आप चाहें तो 10+2 या फिर ग्रेजुएशन के बाद कंपनी सेक्रेट्री का कोर्स कर सकते हैं। यह कोर्स कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ घर बैठे डिस्टेंस एजूकेशन के जरिए किया जा सकता है। कोर्स में इंफॉरमेशन सिस्टम और सिस्टम ऑडिट जैसे विषयों के पढ़ाये जाने की वजह से, आईटी क्षेत्र में भी रोजगार के लिए भी उपयोगी हो गया है। कोर्स के तीन भाग है- फाउंडेशन, इंटरमीडिएट तथा फाइनल। फाउंडेशन कोर्स 10+2 पास या इसके समकक्ष (फाइन आर्ट्स को छोड़कर) कला, वाणिज्य तथा विज्ञान में से किसी भी क्षेत्र के विद्यार्थी कर सकते हैं। इंटरमीडिएट कोर्स फाउंडेशन पास या किसी भी विषय के स्नातक कर सकते हैं। फाइन आटर््स में स्नातक इस कोर्स को नहीं कर सकते हैं। इंटर या फाइनल के बाद विद्यार्थियों को 16 महीनों का मैनेजमेंट ट्रेनिंग भी लेना होता है। कोर्स में प्रवेश पूरे वर्...

What is Electronic Media Advertising

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  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का बढ़ता ग्लैमर नई उम्र के लोगों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वक्त देश में 50 से ज्यादा चैनल चल रहे हैं, जिनमें न्यूज और मनोरंजन दोनों ही चैनल शामिल हैं। कई विदेशी चैनलों के दफ्तर भी भारत में हैं। इन सभी में युवाओं के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। मीडिया  उद्योग आज देश में सबसे तेजी से विकसित होते क्षेत्रों में से एक है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में होने वाले त्वरित विस्तार ने तो लोगों को अचंभित कर दिया है। पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के नाम पर जहां दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे सरकारी संस्थान ही मौजूद थे, वहीं आज निजी चैनलों की भरमार है। सरकार द्वारा प्रसारित होने वाले रेडियो और टेलीविजन चैनलों में भी भारी बढ़ोत्तरी हुई है। दूरदर्शन आज कई क्षेत्रीय चैनलों के अलावा न्यूज, स्पोर्ट्स तथा इंटरटेनमेंट  के लिए अलग-अलग चैनल संचालित कर रहा है। टीवी चैनलों के अलावा एफएम क्रांति ने एक बार फिर से रेडियो को लोकप्रिय बना दिया है। आकाशवाणी के एफएम स्टेशनों के साथ बड़ी संख्या में निजी एफएम चैनल भी खुल रहे हैं। इले...

हैली के साथ चमत्कार

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  चमत्कार सेलिब्रिटीज के साथ भी होते हैं। अभिनेत्री हैली बेरी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। हैली ने हाल ही में एक साक्षात्कार में बताया है कि जब वे मेडीटेशन करती हैं, तो उन्हें ऐसा एहसास होता है, जैसे वे अपने स्वर्गवासी पिता के बिल्कुल करीब हैं। बेरी मानती हैं कि जब आपका किसी अपने से गहरा नाता हो, तो मेडीटेशन की प्रक्रिया से उन्हें अपने करीब महसूस किया जा सकता है। वे अपने पिता की मृत्यु के पश्चात भी मानती हैं कि उनका और उनके पिता का रिश्ता और मजबूत हो गया है। वे उस दिन से ही मेडिटेशन कर रही हैं, जिस दिन उनके पिता इस दुनिया में नहीं रहे थे। जेजीबू में जब वे मेडिटेशन करती हैं, तो कल्पना करती हैं कि पिता उनके सामने बैठे हैं और उनसे बातें कर रहे हैं। बेरी इन दिनों गर्भवती भी हैं और उनके नए खुलासे ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया है। इससे बेपरवाह वे अपने कथन पर पूरी तरह से अटल हैं। हालांकि वे जानती हैं कि उनके पिता का व्यवहार उनकी मां और बहन के प्रति अच्छा नहीं था और वे घर में अक्सर कलह किया करते थे। फिर भी हैली को उनके प्रति कोई नफरत नहीं है और वे उनकी सारी बुराइयों के लिए उन्हें अपनी ओर स...

पेरिस हैं मॉडर्न प्रिंसेस डायना

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  हॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘द क्वीन’ की ऑस्कर पुरस्कार विजेता अभिनेत्री हेलन मिरेन ने एक्ट्रेस और सोशलाइट पेरिस हिल्टन को प्रिंसेस डायना का मॉडर्न वर्जन बताया है। मिरेन का कहना है कि पेरिस और डायना दोनों की परवरिश एक जैसी ही हुई है और दोनों के मन में हमेशा अभिमान का भाव रहा है। डायना ने भी अपने आगे दुनियावालों को मूर्ख समझा और पेरिस को भी उन्होंने डायना के नक्शेकदम पर बताया। खास बात यह है कि सिर्फ मिरेन ही नहीं, बल्कि खुद पेरिस हिल्टन का मानना भी यही है कि वे आधुनिक दौर की डायना हैं। यही नहीं बड़बोली पेरिस ने यहां तक कहा है कि हर दौर में एक न एक आइकॉन जरूर होता है। उन्होंने डायना के साथ-साथ अपनी तुलना मार्लिन मुनरो से भी की है। पेरिस खुद को इस दौर का आइकॉन मानती हैं। हेली बेरी ने किया हैरान अभिनेत्री हेली बेरी ने अपने एक खुलासे से सभी को हैरत में डाल दिया। खुद को तरोताजा रखने के लिए नहाने से कभी परहेज नहीं करने वाली बेरी ने एक फिल्म में अपने किरदार के लिए हद ही कर दी। हेली ने बताया कि 1991 में बनी फिल्म ‘जंगल फीवर’ में अपने किरदार में जान डालने के लिए उन्होंने एक माह तक स्नान नह...

गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़कर 1000 रु. क्विंटल

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  गेहूं का समर्थन मूल्य (एमएसपी) अब एक हजार रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। अब तक 750 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर 100 रुपए बोनस है। नए मूल्य से जहां किसानों को डेढ़ सौ रुपए प्रति क्विंटल की मूल्यवृद्धि का लाभ मिलेगा, वहीं खुले बाजार में कीमतें बढ़ने की संभावना है। नया मूल्य रबी फसल में खरीदी के लिए तय किया गया है। सरकार इस बीच गेहूं का नया आयात सौदा करने के मूड में नहीं है। गेहूं के अलावा मसूर, जौ, चना, सरसों व रेपसीड के समर्थन मूल्य बढ़ाने का फैसला आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी की बैठक में किया गया है। धान का संग्रहण बढ़ाने के लिए भी 50-100 रुपए का अतिरिक्त बोनस दिया गया है। यह मौजूदा 645 रुपए और 675 रुपए प्रति क्विंटल के अलावा दिया जाएगा। बैठक के बाद वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने बताया कि पिछले वर्ष गेहूं का एमएसपी 750 रुपए प्रति क्विंटल था और उस पर 100 रुपए बोनस था। आयात क्यों नहीं: खाद्य मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि सरकार कीमतों पर नजर रख रही है। एसटीसी ने इस साल 13 लाख टन गेहूं आयात के सौदे किए हैं। गेहूं का मौजूदा स्टाक पर्याप्त है और त्योहारी मौसम में राज्यों में ग...

भारती का बाजार मूल्य भी 2 खरब के पार

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  देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने बुधवार को अपने शेयरों में हुए इजाफे के बाद 2 खरब रुपए के बाजार मूल्य वाली कंपनियों में प्रवेश कर लिया। रिलायंस उद्योग और ओएनजीसी पहले ही यह मुकाम हासिल कर चुके हैं। कंपनी के प्रमुख सुनील भारतीय मित्तल भी अब देश के चौंथे सबसे अमीर व्यक्ति हो गए हैं। बुधवार को शेयर बाजार में भारतीय एयरटेल के शेयर मूल्य में 2.60 प्रतिशत का इजाफा हुआ। भारती ने आज बाजार से 2,02,627 करोड़ रुपए एकत्र किए। इसके साथ ही इस टेलीकाम कंपनी का शेयर भाव अपने उच्चतम स्तर 1,149 रुपए पर पहुंच गया है। मित्तल के पास अपने ग्रुप के 50 प्रतिशत शेयर हैं। बुधवार को उनकी कुल संपत्ति में 1,01,314 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ। अब उनकी संपत्ति का बाजार मूल्य बढ़कर 25.51 अरब डॉलर हो गया है और वे मुकेश, अनिल अंबानी और अजीज प्रेमजी के सबसे अमीर क्लब में दाखिल होने में सफल रहे।

सुरक्षा परिषद ने म्यांमार की निंदा की

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  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने म्यांमार में लोकतंत्र के समर्थकों पर हुई सैन्य कार्रवाई की निंदा की है और करीब एक हजार लोकतंत्र समर्थकों के बंदी बनाए जाने पर चिंता जताई है। 15 सदस्यीय परिषद ने पहली बार एक संयुक्त बयान में म्यांमार सरकार की निंदा की है और गिरफ्तार लोकतंत्र समर्थकों को रिहा करने को कहा है। इस संयुक्त बयान में बर्मा में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर की गई हिंसा की कड़ी भर्त्सना की गई है और सभी पक्षों से स्थिति को बिगड़ने से रोकने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की बात कही गई है। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी इस सप्ताह के अंत में एशिया का दौरा करेंगे। वे अपने दौरे के अंत में बर्मा भी जा सकते हैं। गम्बारी पिछले सप्ताह ही बर्मा से वापस लौटे हैं और नवंबर में उनके एक बार फिर बर्मा जाने की उम्मीद की जा रही है। बर्मा में पिछले महीने हुए प्रदर्शनों में 10 लोग मारे गए थे और 2,100 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। खुदकुशी से पहले छात्र ने दागी गोलियां चौदह वर्षीय छात्र अपने दोनों हाथों में रिवाल्वर लिए स्कूल के हॉल में घुसा और तड़ातड़ गोलियां दागनी शुरू कर...

आपके होठों पर लैड

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  एक अमेरिकी कंज्यूमर राइट्स ग्रुप ने पाया है कि 33 बड़े ब्रांडों वाली लिपस्टिक्स में से आधी से ज्यादा में लैड की मात्रा ज्यादा है। कवर गर्ल, ल ऑरियल, क्रिश्चियन डियोर की लिपस्टिक्स इनमें शामिल हैं। उपभोक्ता अधिकारों के लिए काम कर रही संस्था कैंपेन फॉर सेफ कॉस्मेटिक्स ने बोस्टन समेत अमेरिका के 4 शहरों में खरीदे गए लिपस्टिक्स ब्रांड्स की टैस्टिंग की है। संगठन का कहना है कि हालांकि यह ज्यादा लैड की मात्रा किसी स्वस्थ महिला के लिए घातक नहीं है पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए लिपस्टिक में लैड की मात्रा सचमुच ज्यादा है। नेम वाली लाल लिपस्टिक्स को सैंटा फे स्प्रिंग कैलीफोर्निया में बॉडीकोट टैस्टिंग ग्रुप ने टैस्ट किया और पाया कि उनमें से 61 फीसदी में लैड की मात्रा 0.03 से 0.65 पार्ट्स पर मिलियन तक है। संगठन का कहना है कि लैड की मात्रा का उस लिपस्टिक की कीमत से कोई संबंध नहीं है। लिपस्टिक्स टॉफी की तरह शरीर में प्रवेश कर जाती हैं। कैंपेन फॉर सेफ कॉस्मेटिक्स जनस्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, पर्यावरणवादियों और महिला संगठनों का ग्रुप है, जिसका कहना है कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने अभी तक लि...

यूनिवर्सिटी से ज्यादा खर्चीली स्कूली पढ़ाई

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  भारत में स्कूली शिक्षा यूनिवर्सिटी से ज्यादा महंगी है। यह खुलासा यूनेस्को की रिपोर्ट में हुआ है। भारतीय परिवार अपने बच्चों के प्राइमरी स्कूल एजूकेशन पर ज्यादा खर्च करते हैं, जिससे गरीब बच्चों के लिए बुनियादी शिक्षा का मौलिक अधिकार एक दिवा स्वप्न बना हुआ है। इसके विपरीत यूनिवर्सिटी एजूकेशन, जो विशिष्ट रूप से स्टूडेंट्स का भविष्य संवारने में मददगार होता है, प्राइमरी शिक्षा पर होने वाले खर्च के मुकाबले आधी लागत वाला बना हुआ है। 28 फीसदी कमाई बच्चों की पढ़ाई पर खर्च : लोग अपनी कमाई का एक चौथाई से ज्यादा यानी 28 फीसदी अपने बच्चों की प्राइमरी से लेकर सेकंडरी एजूकेशन पर खर्च करते हैं। इतनी ज्यादा फीस गरीब परिवारों के बच्चों के लिए सचमुच बहुत बड़ी बाधा है। यह बात यूनेस्को इंस्टीट्यूट फॉर स्टैटिस्टिक्स द्वारा जारी ग्लोबल एजूकेशन डाइजेस्ट 2007 में कही गई है। हालांकि इसी के साथ लोग यूनि. एजूकेशन पर इस खर्चे का आधा 14 फीसदी लगाते हैं जो स्टूडेंट्स के लिए खास तौर पर फायदेमंद है। दो सौ देशों पर हुई स्टडी :  रिपोर्ट में दो सौ देशों के ताजा एजूकेशन आंकड़ों को अध्ययन का आधार बनाया गया है। इस...